किसानों को मिलेगी 7 हजार रुपए की इनपुट सब्सिडी-हरियाणा सब्सिडी योजना 2023

किसानों को मिलेगी 7 हजार रुपए की इनपुट सब्सिडी-हरियाणा सब्सिडी योजना 2023- धरती के बढ़ते जल स्तर का प्रभाव अब निर्वाचित खेती के अलावा भी दिख रहा है। आज के दिन में, कई राज्यों में लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है, विशेषकर गर्मी के मौसम में इस समस्या ने और भी गहराई प्राप्त की है। यह स्थिति खेती पर भी अपना प्रभाव डाल रही है। सिंचाई की कमी के कारण, विभिन्न क्षेत्रों में कई किसान अब धान की खेती को छोड़ रहे हैं, क्योंकि धान की खेती के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है। इस परिस्थिति में, कई राज्य सरकारें किसानों को धान की खेती नहीं करने की सलाह दे रही हैं और साथ ही उन्हें इसे छोड़ने के लिए इनपुट अनुदान भी प्रदान कर रही हैं। उदाहरण के रूप में, हरियाणा सरकार ने किसानों को धान की खेती नहीं करने पर 7,000 रुपये का इनपुट अनुदान प्रदान करने का निर्णय किया है। इसके अलावा, जिन्होंने पिछली बार धान की खेती की है और इस बार वे खेत को खाली छोड़ते हैं, उन्हें भी प्रति एकड़ के हिसाब से 7,000 रुपये का अनुदान प्रदान किया जाएगा।

किसानों को इनपुट अनुदान का उपयोग करने का तरीका

हरियाणा सरकार ने एक नई पहल की है जिससे वे किसानों को और भी सुझाव प्रदान कर रही है। धान की खेती छोड़ने या खेत खाली छोड़ने पर किसानों को 7 हजार रुपए प्रति एकड़ से प्रोत्साहित करने के लिए एक अनुदान योजना की घोषणा की गई है। इस योजना के तहत, जो किसान धान की खेती नहीं कर रहा है और अपने खेत को खाली छोड़ रहा है, उसे इस प्रोत्साहन राशि का लाभ मिलेगा।

इस योजना के तहत, किसानों को इस प्रोत्साहन राशि को सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त करने का मौका मिलेगा। इसके लिए किसानों को आवेदन करना होगा, जिसमें उन्हें यह बताना होगा कि वे धान की खेती नहीं कर रहे हैं। आवेदन की प्रक्रिया के बाद, कृषि विभाग द्वारा इस बात की पुष्टि होने के बाद ही यह राशि किसानों को दी जाएगी।

इस योजना ने अनुदान की अधिकतम सीमा को भी समाप्त कर दिया है, जिससे किसानों को और भी उत्साहित किया जा रहा है। पहले, यह अनुदान अधिकतम 2 हेक्टेयर तक ही दिया जाता था। इस से किसानों को सीधा लाभ होगा और वे अधिक से अधिक मुनाफा कमा सकेंगे।

दलहन और तिलहन की खेती पर अब 4 हजार रुपए प्रति एकड़ का अनुदान

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश में दलहन और तिलहन के उत्पादन को बढ़ाने के लक्ष्य के साथ कदम उठाया जा रहा है। इसके लिए, किसानों को दलहन और तिलहन की खेती करने पर 4 हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इस योजना की शर्त यह है कि जिन जिलों में पहले बाजरे की खेती की जाती थी, वहां के किसानों को अब दलहन और तिलहन की खेती करते हुए 4 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से अनुदान मिलेगा। इस योजना के तहत, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, झज्जर, हिसार और नूंह जिलों में बाजरे की खेती होती है। राज्य सरकार का मकसद है कि यहां के किसान बाजरे की खेती को छोड़कर दलहन और तिलहन की खेती में रुचि लें, ताकि उन्हें अच्छा मुनाफा हो और भूमि की सेहत में भी सुधार हो। इसके लिए, कृषि विभाग द्वारा किसानों को दलहन और तिलहन उत्पादन की आधुनिक तकनीक की जानकारी दी जाएगी और उन्नत किस्मों के बारे में भी सूचना प्रदान की जाएगी, ताकि इस खरीफ सीजन में किसान अच्छा मुनाफा कमा सकें।

दलहन फसलों का महत्व

दलहनी फसलों की जड़ ग्रंथियों में राइजोबियम बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो इन फसलों की जड़ों में सहजीवी संबंध बनाकर वायुमंडलीय नाइट्रोजन का मृदा में स्थिरीकरण करते हैं। इससे मृदा में नाइट्रोजन की मात्रा में वृद्धि होती है, जिससे इन फसलों को कम नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है। इन फसलों की कटाई के बाद इनके अवशेष मृदा में नाइट्रोजन की मात्रा बनाए रखने में सहायक होते हैं। ये अग्रिम फसल के उत्पादन में नाइट्रोजन उर्वरकों की मात्रा के प्रयोग को कम कर देते हैं। इन फसलों को हरी खाद के विकल्प के तौर पर उगाया जा सकता है। दहलनी फसलों के उत्पादन से मिट्टी की सेहत में सुधार होता है और मृदा उपजाऊ बनी रहती है।

दलहन फसलों के उत्पादन से होने वाले लाभ

  1. दलहन फसलें बोने से खेत की भूमि में सुधार होता है।
  2. उसकी सेहत अच्छी बनी रहती है।
  3. उर्वराशक्ति बढ़ने से फसल की जड़ों का फैलाव अच्छा होता है।
  4. भूमि की नाइट्रोजन शक्ति बढ़ती है जो फसलों के लिए आवश्यक है, और इससे अधिक उत्पादन होता है।
  5. मिट्टी की जल धारण शक्ति बढ़ती है, जिससे सिंचाई के बाद अधिक समय तक भूमि में नमी बनी रहती है।
  6. दलहन व तिलहन की फसल को धान और बाजरे की तुलना में अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता पड़ती है।

इनपुट अनुदान प्राप्त करने के लिए किसान कहां करें आवेदन

जो किसान इनपुट अनुदान राशि प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें इसके लिए आवेदन करना होगा। आवेदन करने के लिए ऑनलाइन आवेदन मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर किया जा सकता है। इसके अलावा, किसान अपने क्षेत्र के खंड कृषि अधिकारी कार्यालय में संपर्क करके मेरा पानी मेरी विरासत स्कीम में अपने नाम को पंजीकृत करवाकर सकते हैं।

तुरंत आवेदन करने के लिए आवश्यक दस्तावेज:

  1. आवेदन करने वाले किसान का आधार कार्ड
  2. आवेदन करने वाले का पहचान पत्र
  3. आवेदक का निवास प्रमाणपत्र
  4. मोबाइल नंबर जो आधार से लिंक हो।
  5. खेती की जमीन के कागजात
  6. किसान का पासपोर्ट साइज फोटो।
  7. बैंक खाता विवरण हेतु पासबुक की कॉपी।

आवेदन प्रक्रिया:

  1. आवेदन करने वाले किसान को मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
  2. आवेदक को सभी आवश्यक दस्तावेज साथ में स्कैन करके अपलोड करना होगा।
  3. ऑनलाइन आवेदन के बाद, किसान को अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी कार्यालय में जाकर भी आवश्यक दस्तावेज साबित करना होगा।
  4. आवेदक को आवेदन स्थिति की जानकारी अपडेट करने के लिए आवेदन नंबर और पासवर्ड का उपयोग करना होगा।
  5. सफल आवेदन के बाद, किसान को अधिकारिक सूचना स्वरूप एक स्वीकृति पत्र प्राप्त होगा।

समापन:

इस प्रक्रिया के माध्यम से, हरियाणा सरकार किसानों को दलहन और तिलहन की खेती के लिए इनपुट अनुदान प्रदान करके उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। इससे खेती में उन्नति होगी और भूमि की सुधार होगी, जिससे किसान अधिक मुनाफा कमा सकेंगे। इसके साथ ही, यह किसानों को नई तकनीकों और उन्नत खेती के लिए जागरूक करने में भी मदद करेगा।

प्रामाणिक पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ):

प1: राज्य सरकार किसानों को कैसे 7,000 रुपए की इनपुट सब्सिडी प्रदान कर रही है?

उ1: राज्य सरकार ने एक नई पहल शुरू की है जिसमें वह किसानों को 7,000 रुपए प्रति एकड़ की इनपुट सब्सिडी प्रदान कर रही है। इसे प्राप्त करने के लिए किसानों को कृषि विभाग के माध्यम से आवेदन करना होगा, और जब इसे स्वीकृति मिलेगी, तो यह राशि सीधे उनके बैंक खाते में जमा की जाएगी।

प2: इस इनपुट सब्सिडी को कैसे प्राप्त किया जा सकता है?

उ2: किसानों को इस सब्सिडी को प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन करने के लिए उन्हें कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवश्यक जानकारी दर्ज करनी होगी।

प3: इस योजना की शर्तें क्या हैं?

उ3: इस योजना के तहत, जिन किसानों ने पिछले बार खेती की थी और इस बार अपने खेत को खाली छोड़ रहे हैं, उन्हें भी इस सब्सिडी का लाभ होगा।

प4: इस योजना का उद्दीपन क्या है?

उ4: इस योजना का उद्दीपन किसानों को धान की खेती छोड़ने या खेत को खाली छोड़ने पर प्रोत्साहित करना है, ताकि उन्हें अधिकतम समर्थन मिल सके और वे नई कृषि प्रवृत्तियों की ओर बढ़ सकें।

प5: क्या इस योजना का सीमा है?

उ5: नहीं, इस योजना की अधिकतम सीमा को हटा दिया गया है, जिससे किसानों को ज्यादा से ज्यादा उनके खेतों को खाली छोड़ने पर भी इस सब्सिडी का लाभ हो सकता है।

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